हम क्या करते हैं
AI टूल्स और बिजनेस सॉफ्टवेयर का सब्सक्रिप्शन लेना आसान है। मुश्किल है सही प्लान चुनना, उसे सुरक्षित तरीके से सेट करना, और फिर हर महीने संभालना। यह काम हम करते हैं:
- सही प्लान चुनना: कौन सा टूल, कौन सा प्लान और कितनी सीट (यूजर लाइसेंस) — आपकी टीम के काम के हिसाब से, ताकि पैसा गलत प्लान या बिना इस्तेमाल वाली सीटों पर न जाए।
- सब्सक्रिप्शन का इंतजाम: ChatGPT, Claude, Gemini, Microsoft 365 Copilot, GitHub Copilot, Perplexity जैसे AI टूल्स, और Microsoft 365, Google Workspace और Zoho जैसे बिजनेस सॉफ्टवेयर के सब्सक्रिप्शन — और दूसरे टूल्स के भी।
- टीम के लिए सेटअप: एडमिन कंसोल, SSO से साइन-इन, डेटा कंट्रोल और रिटेंशन की सेटिंग (जहां प्लान में ये सुविधाएं हों), और AI के इस्तेमाल की एक लिखित पॉलिसी, ताकि सबको पता हो कि क्या ठीक है और क्या नहीं।
- सीट और रिन्यूअल: नए लोगों को सीट देना, कंपनी छोड़ने वालों की सीट हटाना, रिन्यूअल की तारीखों पर नजर रखना, और जिन लाइसेंसों का कोई इस्तेमाल नहीं कर रहा, उन्हें हटाना।
- एक संपर्क, एक बिल: सारे सब्सक्रिप्शन के लिए बात करने के लिए एक ही व्यक्ति, और सबका बिल एक साथ — INR, USD, AED, GBP या EUR में। भारतीय इनवॉइस पर GST अलग से जुड़ता है।
- ट्रेनिंग: टीम को सिखाना कि ये टूल्स रोज के काम में सही तरीके से और पॉलिसी के हिसाब से कैसे इस्तेमाल करें — और एडमिन को यह कि सीट, SSO और डेटा कंट्रोल कैसे संभालें।
इस पेज पर दिए गए प्रोडक्ट के नाम उनके मालिकों के ट्रेडमार्क हैं, और इनका इस्तेमाल सिर्फ यह बताने के लिए है कि हम किन टूल्स का इंतजाम कर सकते हैं। Effred Technologies एक स्वतंत्र सर्विस प्रोवाइडर है।
ChatGPT का बिजनेस सब्सक्रिप्शन या पर्सनल अकाउंट?
कई कंपनियों में AI का इस्तेमाल ऐसे शुरू होता है: हर व्यक्ति अपने कार्ड से ChatGPT या कोई दूसरा टूल ले लेता है, और बाद में खर्च रीइम्बर्स हो जाता है। शुरुआत के लिए यह आसान है, लेकिन जल्दी ही दिक्कतें आने लगती हैं:
- कंपनी के डॉक्यूमेंट, ग्राहकों की जानकारी और कोड ऐसे पर्सनल अकाउंट में पहुंच जाते हैं, जिन पर कंपनी का कोई कंट्रोल नहीं होता।
- कोई कर्मचारी कंपनी छोड़ता है, तो उसका अकाउंट और सारी चैट उसी के पास रह जाती हैं।
- किसके पास कौन सा टूल है और कुल कितना खर्च हो रहा है, यह किसी एक जगह नहीं दिखता।
- हर टूल का बिल अलग कार्ड पर आता है, और रिन्यूअल की तारीखें किसी को याद नहीं रहतीं।
बिजनेस सब्सक्रिप्शन में आम तौर पर एक एडमिन कंसोल होता है: किसे सीट मिलेगी, साइन-इन कैसे होगा, डेटा कितने समय रखा जाएगा, और कंपनी छोड़ने वाले की सीट कब हटेगी — यह सब कंपनी तय करती है। कौन सी सुविधा किस प्लान में मिलती है, यह हर प्रोवाइडर में अलग है और समय के साथ बदलती रहती है, इसलिए प्लान चुनने से पहले उसकी मौजूदा शर्तें जरूर पढ़ें।
गुरुग्राम में सब्सक्रिप्शन वेंडर कैसे चुनें
सब्सक्रिप्शन आप सीधे प्रोवाइडर से भी ले सकते हैं। वेंडर तब फायदेमंद है, जब वह सब्सक्रिप्शन दिलवाने के साथ-साथ सही प्लान, सेटअप और बाद का काम भी संभाले। किसी से भी बात करें — हमसे भी — तो ये बातें जरूर पूछें:
- सलाह, सिर्फ बिक्री नहीं। क्या वे यह भी बताते हैं कि किस टूल या प्लान की आपको जरूरत नहीं है, और कम सीटों से शुरू करने को कहते हैं?
- अकाउंट किसके नाम पर। एडमिन अकाउंट, डेटा और सब्सक्रिप्शन आपकी कंपनी के नाम पर होंगे या वेंडर के, और वेंडर बदलने पर क्या होगा — यह लिखित में तय करें।
- सेटअप शामिल है या नहीं। SSO, डेटा कंट्रोल, रिटेंशन की सेटिंग, इस्तेमाल की पॉलिसी और ट्रेनिंग साथ में मिलेगी, या सिर्फ लाइसेंस?
- सीट और रिन्यूअल कौन देखेगा। नए लोगों को जोड़ना, छोड़ने वालों की सीट हटाना और रिन्यूअल से पहले याद दिलाना — यह किसकी जिम्मेदारी है।
- साफ बिल। हर टूल की सीट, अवधि और रिन्यूअल की तारीख बिल में अलग से दिखे, आपकी करेंसी में, और भारत में GST के साथ।
- एक संपर्क व्यक्ति। कोई दिक्कत हो या नया यूजर जोड़ना हो, तो किससे बात करनी है।
- पार्टनर होने का दावा। अगर कोई वेंडर किसी प्रोवाइडर का पार्टनर होने की बात कहे, तो उसकी पुष्टि प्रोवाइडर से कर लें।
“सबसे अच्छा” वेंडर वही है, जो इन सवालों के साफ और लिखित जवाब दे।